उसका आकाश

अभी सूर्योदय पूरी तरह से नहीं हुआ था, उषा की लालिमा से रंगे आकाश को सूर्य की रश्मियां भेद कर धरती पर आने का प्रयास कर रही थीं. पिता के अस्वस्थ होने के कारण सजल को उनके स्थान पर भोर की बेला में गंगा स्नान के बाद मंदिर जाना पड़ता था. अपने पापा का हर आदेश पूरा करना सजल का ध्येय था. आखिर उसकी इच्छा-पूर्ति के लिए उसके पापा ने अपना पुश्तैनी घर ही नहीं अपनी ज़मीन-जायदाद भी अपने विश्वस्त

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