अंकिता

अर्पित को स्कूल जाता देखते ही घरों से औरतें बाहर निकल आई थीं. अर्पित के स्कूल का रास्ता उसके पुराने बंगले के सामने से हो कर जाता था.“कहो, बेटा, तुम्हारी मम्मी वापिस आई या नहीं?’ “हाय-हाय कैसी निर्दयी माँ थी, बेटे का भी मोह नही रहा, मजे करने भाग गई.”” ““अरे भगोड़ी कलंकिनी के गम में इसके पापा ने ज़हर खा कर जान दे दी.” सबकी बातें सुनता अनुत्तरित अर्पित रोता हुआ घर वापिस आ गया. “क्या हुआ मुन्ना, स्कूल

About the Author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *